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दम टूटता रहा पर करीबी नसीब ना हुई

Posted On: 9 May, 2013 मस्ती मालगाड़ी में

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दुनिया में ऐसे बहुत कम लोग होते हैं जिन्हें मरते समय करीबी नसीब होती है. हर व्यक्ति यही चाहता है कि जब उसे मौत गले लगाने आए तो उसके अपने उसके साथ हों पर इस चमकदार दुनिया में बहुत बार ऐसा हुआ है जब अखिरी सांस ली तो आसपास अपने तो दूर कोई दुश्मन भी नहीं था. कहते हैं ना कि ज्यादा  चमकने वाली चीज में धोखा होता है ऐसा ही कुछ हाल हिन्दी सिनेमा का है. दूर से देखने पर हिन्दी सिनेमा की चमक आंखें धुंधला देती है पर इसके पीछे का राज सिर्फ वो ही जानते हैं जो इस दुनिया को करीब से जानते हैं. हिन्दी सिनेमा की रंगीन दुनिया में कुछ ऐसी मौतें हुई हैं जिनके राज आज भी अनसुलझे हैं.

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‘मधुबाला’ हिन्दी सिनेमा का ऐसा नाम है जो आज भी सालों बाद याद किया जाता है. 36 साल की उम्र…हिन्दी सिनेमा का मशहूर नाम, हमेशा आसपास लाखों लोगों की भीड़ पर मौत के समय पास में कोई एक व्यक्ति भी नहीं था. 23 फरवरी साल 1968  को ‘मधुबाला’ ने हिन्दी सिनेमा की रंगीन दुनिया को अलविदा कह दिया.


‘कागज के फूल’ और ‘प्यासा’ जैसी सुपरहिट फिल्में बनाने वाले ‘गुरुदत्त’ बहुत ही संवेदनशील कलाकार थे पर आज भी यह कोई नहीं जानता है कि उनकी मौत खुदकुशी थी या साजिश. साल 1964 में एक रोज गुरुदत्त के कमरे में उनकी लाश मिली जिसके बाद तमाम मीडिया अखबारों में यही खबर थी कि गुरुदत्त की मौत अत्यधिक नींद की गोलियां खाने की वजह से हुई.


‘स्मिता पाटिल’ की निजी जिंदगी हमेशा सवालों में ही बंधकर रह गई. फिल्मों पर बेहद बोल्ड से बोल्ड दृश्य देने में संकोच ना करने वाली स्मिता पाटिल असल जिंदगी में एक बेहद शांत महिला थीं. लेकिन राज बब्बर के साथ उनके संबंधों ने उन्हें दुनिया की निगाहों में एक घर तोड़ने वाली महिला का नाम थमा दिया पर राज बब्बर से शादी के कुछ समय बाद ही पुत्र प्रतीक बब्बर को जन्म देने के बाद 13 दिसंबर, 1986 को उनका निधन हो गया. उनकी मौत का रहस्य भी काफी गहरा है. कुछ मानते हैं कि वह राज बब्बर की बेरुखी से बुरी तरह निराश थीं जिस कारण हमेशा तन्हां रहती थीं तो वहीं उनके बेहद करीबी रहे मृणाल सेन मानते हैं कि दवाइयों की अनदेखी करने की वजह से उनकी मौत हुई.

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हिन्दी सिनेमा ने साल 1985 में अचानक ही अपनी एक अनमोल चीज को खो दिय था जिनका नाम था ‘संजीव कुमार’. संजीव कुमार को उनके समय का चलता-फिरता एक्टिंग स्कूल कहा जाता था. कुछ लोगों का कहना है कि शराब की लत के कारण उनकी मौत हुई जब कि कुछ यह मानते है कि शराब की लत उन्हें नहीं थी बल्कि दिल का दौरा पड़ने के कारण उनकी मौत हुई थी.


हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में मात्र 4 वर्ष बिताकर मौत को गले लगाने वाली क्यूट और बबली अभिनेत्री ‘दिव्या भारती’ की मौत के पीछे की सच्चाई से भी कोई वाकिफ नहीं है. लोगों का मानना है कि 19 अप्रैल, 1993 के दिन दिव्या भारती ने अपनी बिल्डिंग के पांचवें माले से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली. लेकिन उन्होंने ऐसा क्यों और किसके कहने पर किया यह कोई नहीं जानता. कुछ का तो यह भी कहना है कि दिव्या भारती को किसी ने धक्का देकर मार डाला था.

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साल 2005, 22 जनवरी का दिन शायद ही हिन्दी सिनेमा में भुलाया जा सकेगा क्योंकि उसी दिन दक्षिण मुंबई के एक फ्लैट में ‘परवीन बॉबी’ मृत पड़ी मिली थीं और उनकी मौत के दो दिन बाद उनका शव मिला था. कुछ लोगों ने कहा कि प्रेम रोग ने उनकी जान ले ली और कुछ ने कहा कि किडनी के काम ना करने की वजह से उनकी मौत हुई.


मीना कुमारी फिल्मों में ‘ट्रेजिडी क्वीन’ के नाम से तो मशहूर थीं ही लेकिन उनका असली जीवन भी दुखों से भरा हुआ था. जब मीना कुमारी के पति कमाल अमरोही ने उन पर जुल्म किए, तो उन्होंने शराब का सहारा लिया और देखते ही देखते उनको शराब की लत पड़ गई. मीना कुमारी के करीबी लोगों का कहना है कि इसी शराब के लत के कारण साल 1972 में 39 वर्ष की उम्र में उनकी मौत हो गई.

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