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हिन्दी सिनेमा का सफरनामा

भारतीय सिनेमा जगत की गौरवमयी गाथा

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दिलीप की अनारकली मधुबाला नहीं नरगिस थीं !!

पोस्टेड ओन: 17 Apr, 2013 मस्ती मालगाड़ी में

Mughal-E-Azam True Story

दिलीप कुमार और मधुबाला का नाता सच में किस्मत से जुड़ा था. फिल्म मुगल-ए-आजम से इन दोनों की प्रेम कहानी शुरू हुई थी पर क्या आपको पता है कि इस फिल्म में अनारकली का किरदार निभाने के लिए मधुबाला को नहीं नरगिस को लिया जाना था पर जब नरगिस ने अनारकली का किरदार निभाने से मना कर दिया तो मधुबाला के नाम पर विचार किया गया. कुछ ऐसा ही दिलीप कुमार के साथ भी हुआ था. चाहे आप यकीन करें या नहीं पर स्वयं दिलीप कुमार को इस बात पर यकीन नहीं था कि वो फिल्म मुगल-ए-आजम में सलीम के किरदार को निभा भी पाएंगे या नहीं? जब निर्देशक आसिफ ने दिलीप कुमार को लंदन भेजा और उनके सिर पर लगने वाले विग पर तीन लाख रुपए खर्च किए तब जाकर उन्होंने इस फिल्म में सलीम नाम का किरदार निभाने की चुनौती को कुबूल किया.

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Dilip Kumar Affair Madhubala

dilip and madhubalaनिर्देशक के. आसिफ ने अपनी फिल्म मुगल-ए-आजम को ऐतिहासिक फिल्म बनाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था. फिल्म मुगल-ए-आजम अपने समय की सबसे महंगी फिल्म थी जो कि 5 अगस्त 1960 को डेढ़ सौ थियेटरों में एक साथ रिलीज हुई थी. फिल्म मुगल-ए-आजम से जुड़ी हुई कुछ ऐसी ही दिलचस्प बातें हैं जिन्हें जानकर आप हैरत में पड़ जाएंग़े.


शापूरजी पलोनजी मिस्त्री के बारे में शायद कम ही लोगों को पता हो कि उनकी ही कंपनी ने 1960 में रिलीज हुई ऐतिहासिक फिल्म मुगले-आजम के निर्माण में अहम भूमिका निभाई थी. पंद्रह साल में बनी इस फिल्म पर उस जमाने में डेढ़ करोड़ रुपये खर्च हुए थे. निर्देशक के. आसिफ का मानना था कि
‘मुहब्बत हमने माना, जिंदगी बरबाद करती है
ये क्या कम है कि मर जाने पे दुनिया याद करती है,
किसी के इश्क में… इसी पंक्ति को आधार बनाकर के. आसिफ ने फिल्म मुगल-ए-आजम की कहानी का निर्देशन किया था.

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फिल्म का काम बेहद धीमी गति से होता था. के. आसिफ उन दिनों एक-एक दृश्य के लिए बहुत मेहनत करते थे . पूरे वर्ष के दौरान मात्र एक सेट के सींस ही शूट किए गए थे. पहले एक साल में सिर्फ पृथ्वीराज कपूर के सींस ही शूट किए गए थे इसलिए निर्माता शपूर जी मिस्त्री निर्देशक के. आसिफ के धीमी गति वाले काम से तंग आकर उनके हाथ से इस फिल्म के निर्देशन को वापस लेने की बात कर चुके थे परंतु पृथ्वीराज कपूर और दिलीप कुमार उन्हें समझाते थे कि के. आसिफ के बिना यह फिल्म नही बनेगी जिस कारण अंतिम तक उन्होंने ही फिल्म का निर्देशन किया.


पृथ्वीराज कपूर और दिलीप कुमार मुगल-ए-आजम में अकबर और सलीम के रोल के लिए पहली पसंद नहीं थे. अकबर के किरदार के लिए लिए पहले चन्द्रमोहन और सलीम के किरदार को निभाने के लिए सप्रू का नाम तय किया गया था पर फिर बाद में पृथ्वीराज कपूर और दिलीप कुमार को ही इन किरदारों को निभाने का दायित्व दिया गया. फिल्म मुगल-ए-आजम ने रिकार्ड तोड़ कमाई की जिसने 1975 में बनी फिल्म शोले को भी पीछे छोड़ दिया. नौशाद के संगीत के साथ-साथ दिलीप कुमार और मधुबाला की जोड़ी ने इस फिल्म को भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक मील का पत्थर बना दिया.


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