blogid : 11280 postid : 376

बस शक्ल पर ही मरते हैं दर्शक

Posted On: 15 Feb, 2013 मस्ती मालगाड़ी में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

इरफान खान, यह तो अलग टाइप की फिल्मों के सितारे हैं, कमर्शियल फिल्मों में इनकी एक्टिंग कुछ खास नहीं जंचती. व्यवसायिक फिल्मों के लिए यह एक बेहतर चयन नहीं हैं. कुछ ऐसी ही धारणा रखते हैं हम अभिनेता इरफान खान के बारे में. भले ही वैश्विक स्तर पर इरफान खान का नाम एक सितारे की तरह चमकता हो लेकिन इस बात में कोई दो राय नहीं है कि सशक्त अभिनय की पहचान बन चुके इरफान खान को बॉलिवुड मसाला फिल्मों के लिए बिल्कुल भी फिट नहीं समझा जाता.


Read - अरेंज्ड मैरेज से सजी बॉलिवुड की महफिल

इरफान खान बॉलिवुड में काम तो करते हैं लेकिन उनकी उपस्थिति बहुत ही कम नजर आती है. जब इरफान खान से पूछा गया कि अखिर ऐसा क्यों तो उनका साफ कहना था कि हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री को समझ में ही नहीं आया कि उनका क्या किया जाए. उन्हें हर बार विलेन बनने के ही ऑफर दिए गए लेकिन उन्होंने इससे इंकार कर दिया. अब आगे का रास्ता ना तो बॉलिवुड जानता है और ना ही वो खुद.


Read – सितारों की अधूरी प्रेम कहानियां !!!

इरफान खान, अभिनय के क्षेत्र के माने हुए खिलाड़ी हैं. इतना ही नहीं वह अन्य सितारों की तरह बस दर्शकों का मनोरंजन करने में भी विश्वास नहीं रखते. उनके लिए अभिनय और मनोरंजन दोनों का कुछ मतलब है और वह बेवजह के और थोथे मनोरंजन के पचड़े में नहीं पड़ना चाहते.


Read - अमिताभ और रेखा – खामोशियों के भी अलफाज होते हैं !!

आज निर्माता और निर्देशक बस इसी उम्मीद से फिल्म बनाते हैं कि किसी तरह उनकी फिल्म उम्दा कारोबार कर सौ करोड़ के क्लब में शामिल हो जाए. यहां तक कि कलाकार भी अपनी एक्टिंग को नहीं प्रमोशन और अपनी पब्लिसिटी को ही महत्व देते हैं जबकि इरफान खान का कहना है कि सौ करोड़ का टैग बेहूदा है और इसका अभिनय से सीधा कोई वास्ता नहीं है और इस टैग से फिल्म इंडस्ट्री का कोई भला नहीं होने वाला. फिल्म चाहे कोई भी हो लेकिन एक कलाकार के लिए वह बहुत महत्व रखती है, किसी की अदाकारी को पैसे से आंकना सही नहीं है.


Read - कजरारे नैनों की कहानी !!!(पार्ट -1)

इरफान खान जिन फिल्मों में काम करते हैं उनका कॉंसेप्ट बहुत अलग होता है, वह फिल्में आम दर्शक की पसंद नहीं बन पातीं. उनके विषय में कहा जाता है कि वह बस बुद्धिजीवियों की पसंद हैं. हालांकि यह उनके लिए एक कॉम्प्लीमेंट ही है लेकिन इरफान इसे अपनी नाकामी बताते हैं. उनका कहना है कि कोई व्यक्ति कलाकार इसीलिए बनता है ताकि वह दर्शकों की पसंद बन पाए, उनका मनोरंजन कर पाए, लेकिन मेरी पसंदगी सिर्फ एक वर्ग तक सीमित रह गई है इसीलिए मैं खुद को इस मामले में असफल मानता हूं.


Read - कौन कम्बख्त बर्दाश्त करने के लिए पीता है


दर्शक जिस कलाकार की फिल्म उसकी शक्ल या आउटलुक देखकर देखने नहीं आते बल्कि उन्हें उस कलाकार के साथ जुड़ाव महसूस होता है इसीलिए वह फिल्म देखने आते हों वास्तव में वही एक सफल कलाकार माना जाएगा. अन्य तो बस शो पीस की तरह हैं जो आज पसंद आते हैं और कल कुछ बेहतर दिख जाने के बाद उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है.



कुछ घटनाओं का उदाहरण देते हुए इरफान कहते हैं कि “नेमसेक फिल्म के बाद जब मीरा नायर ने प्रदर्शनी लगाई थी वहां एक महिला मेरी तस्वीर के आगे खड़े होकर रोने लगी थी और जब स्लमडॉग मिलियनेयर रिलीज होने के बाद एक भारतीय ने उनसे हाथ मिलाकर कहा कि 30 साल हो गए अमरीका में रहते हुए, कभी भी इतनी अच्छी फीलिंग नहीं आई जितनी इस फिल्म को देखने के बाद आई है.



इरफान कहते हैं यही मेरी उपलब्धियां हैं, लेकिन बस एक ही बात खलती है कि बॉलिवुड में कमर्शियल और ऑफबीट फिल्मों को एक ही तराजू में नहीं तौला जाता. किसी की प्रतिभा के साथ यह बहुत बड़ा अन्याय है.




Read

एडवांस बुकिंग भी फुल और काउंटर पर भी लंबी कतारें !!

कभी-कभी मेरे दिल में खयाल आता है…….

जिंदगी का साथ निभाता चला गया….




Tags: irfan khan movies, irfan khan films, commercial vs art movies, irfan in films, saheb biwi and gangster returns, saheb biwi or gulam, साहेब,बीवी और गैंगस्टर, इरफान खान






Tags:                   

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

प्रिया के द्वारा
February 16, 2013

इरफान खान मंझे हुए कलाकार हैं. उनकी एक्टिंग क्षमता पर किसी को भी संदेह नहीं है


topic of the week



latest from jagran